।। यही मेरा नज़रिया है ।।

।। यही मेरा नज़रिया है ।।



रातें ही नहीं काली
दिन में भी अंधेरा है
आज मेरा शहर कुछ
यूँ ही ठहरा-2 है।

रोते से हैं जस्बात
अभी उनकी बात पूरी
कहाँ हुई जनाब
ढोल पीट लेना ही
उनका बस नज़रिया है।

वो सोचते हैं हर
बात का इलाज़
बस बातें हैं
ठोस इन्तेज़ामात तो
कर नहीं सकते
इसलिए समर्थन मांगना
उनका बस नज़रिया है।

डरता हूँ बस ये सोचकर
कि लोग भी उन्हें ख़ुदा समझते हैं
सोचता हूँ कि कहीं देर
न हो जाये हक़ीक़त
समझने में।
क्योंकि देर हुई अगर
तो अँधेरा गहराएगा
उनका कुछ नहीं जाएगा
क्योंकि उनके लिए सब बढ़िया-2 है।

लेकिन जीतते हुए देखना चाहता हूँ
उनको फिर भी मैं
क्योंकि चाहता हूँ मेरा शहर
फिर से रौशन हो
रातें फिर से चमक उठें
मेरे विचार न मिलते हों उनसे
कोई बात नहीं
हम सब जीतें एक साथ
यही मेरा नज़रिया है।

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