।। नज़रें झुकाओ तो पता चले ।।

।। नज़रें झुकाओ तो पता चले ।।



नज़रें झुकाओ तो पता चले
कि ज़मीन कैसी है

नजरें झुकाओ तो पता चले
कि कितने सूखे पत्ते गिरे हैं राहों में

नजरें झुकाओ तो पता चले
कि कितनी नज़रें बिछीं है तेरी राहों में

कभी-2 ज़रूरी होता है नज़रें झुकाना
ख़ुद को जानने के लिए भी

और कभी-2 ज़रूरी होता है नज़रें झुकाना
अपने क़रीब आने के लिए भी

नज़रें झुकाओ तो पता चले
कि मंज़िलें कदमों से नापी जाती हैं

और कभी-2 ज़रूरी होता है नज़रें झुकना
अपनी परछाईं को नापने के लिए भी

क्योंकि परछाईं ही बतलाती है
कि वक़्त शुरू हुआ है या ढल रहा है

क्योंकि परछाईं ही बतलाती है
कि अभी सुबह हुई है कि शाम

नज़रें झुकाओ तो पता चले
कि राह में कांटे हैं या फूल बिखरे पड़े हैं

नज़रें झुकाओ तो पता चले
कि बाकी सब ही नहीं तुम भी एक परछाईं हो

बस परछाई! सिर्फ एक परछाई!
तुम सिर्फ एक परछाईं हो

वही परछाईं जो कुछ पल के लिए दिखती है
और फिर गायब हो जाती है

वही परछाईं जो भूल जाती है
कि कोई अस्तित्व है ही नहीं उसका

वही परछाईं जिसको सुबह अपने कद का गुमां होता है
और शाम को कद बढ़ा के फिर गुम हो जाती है

नज़रें झुकाओ तो पता चले
कि तुम सिर्फ एक परछाईं हो

कभी-2 ज़रूरी होता है नज़रें झुकाना
जानने के लिए कि तुम सिर्फ एक परछाईं हो

मिट जाओगे आज नहीं तो कल
कि तुम सिर्फ एक परछाईं हो

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