।। रात भर ।।



।। रात भर ।।



मुझे नींद नहीं
तेरी याद चाहिए।
तेरी याद हो
तो जाग सकता हूँ रात भर।

तेरी याद भी नहीं
मुझे तू ही चाहिए।
तू हो पास
तो निहार सकता हूँ तुझे रात भर।

याद है देखा था
तुझे जब पहली बार।
सिर्फ देखा था
और सो नहीं पाया था रात भर।

वो तेरी याद की
पहली रात थी।
इबादत में तेरी
जागा था रात भर।

शक़ था तुने पसंद
किया था कि नहीं।
कई रातें ये सोच कर
जागा था रात भर।

फिर वो तेरा इकरार करना
कि तुझे मंज़ूर था साथ मेरा।
खुशी का जाम यूँ चढ़ा
कि नशे में जागा था रात भर।

वो रात थी,
या नशे का
जाम थी शायद
झूमता खुमार में
जागा था रात भर।

सिलवटें तनहाइयों में बढ़ने लगी थी
चादरें भी तन्हाई मेरी
बयां करने लगी थीं।
जागती थीं वो भी मेरे साथ रात भर।

जागे हुए बस ख्वाब चला करते थे,
ख्वाब में कुछ मंज़र हुआ करते थे।
कुछ खूबसूरत, कुछ रूमानी से
और मंजरों में घूमते थे
हम और तुम रात भर।

फिर वो दिन आया
जब हम मिले थे दोबारा।
वो थोड़ा सा वक़्त बिताना तुम्हारे साथ
मुझे फिर से तन्हा कर गया रात भर।

फिर तुमसे बाते होती रही
फोन पर ही सही मुलाकाते होती रही।
वो तुमसे बात करना फोन पर
और करवटें बदलते रहना रात भर।

सिलसिला एक दिन का नही
महीनों यूँ ही चलता रहा।
फोन पर ही सही बाते होती रही
और यूँ तुम्हारा साथ मिलता रहा रात भर।

फिर आखिकार वो रात आई
बेसब्र थे हम दोनों जिसके लिए।
फिर उस रात में तुम्हारा
थक के मेरी बाहों में सो जाना रात भर।

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