।। एक छोटी कहानी ।।

।। एक छोटी कहानी ।।

छोटी छोटी कहानियों को
बड़े एहसासों में मत बदलो।
तुम भी एक छोटी कहानी हो
और मैं भी एक छोटी कहानी हूँ।

रफ्तार तुम्हारी मुझसे ज़्यादा हो सकती है
हो सकता है कि तुम मुझसे आगे निकल जाओ।
पर तब भी तुम एक छोटी कहानी ही हो
और मैं भी एक छोटी कहानी ही हूँ।

कोई बुद्ध से पूछ के देखे
महावीर ने भी यही कहा था।
के तुम भी एक छोटी कहानी हो
और मैं भी एक छोटी कहानी हूँ।

ये जस्बात बड़े गहरे हो चले हैं मेरे,
फिक्र करने लगा हूँ ज़माने की।
मुझे लगने लगा है कि
ज़माने को बदल दूंगा मैं।

बड़ा घमंड हो चला है मुझे
अपने आप पर।
लगने लगा है कि सब कुछ
हासिल कर सकता हूँ मैं।

यही सोचते-सोचते
यूँ ही भागते-भागते।
भूल ही गया था मैं
भूल गया कि घमंड किस बात का?

दूसरों की तेज रफ्तार देखता रहा
और उसी रफ्तार में खो दिया अपने अक्स को।
खो दिया वो जो मेरा अपना था
भूल गया अपने वजूद को।

भूल गया कि ये रफ्तार बड़ी बेगैरत है
भूल गया कि इस रफ्तार ने
डुबोए है कई जहाज़,
उड़ाए हैं कई मकान।

रफ्तार बढ़ती रही
तन्हाई जमती रही।
वजूद खोता रहा
रोज़ मिटता रहा।

पर एक दिन पीछे मुड़ कर देखा
देखा एक जीवंत चेहरा।
देखा एक खिलखिलाता बच्चा
देखी एक निर्भीक मुस्कान।

थोड़ा जागा उस क्षण
थोड़ा पाया अपने अक्स को।
महसूस हुआ कि फिज़ूल
ही भाग रहा था मैं।

आखिर क्या पाना था मुझको
आखिर क्यों जाना था उस ओर।
क्यों जाना था उस ओर
जहाँ सब भाग रहे थे।

तभी याद आया बुद्ध का वो चेहरा
याद आयी उस चेहरे में बसी शांति।
याद आया कि तुम भी एक छोटी कहानी हो
और मैं भी एक छोटी कहानी हूँ।

याद आया कि ये वक़्त न तुम्हारा रहा है
याद आया कि ये वक़्त मेरा भी नही रहा है।
याद आया कि तुम भी एक छोटी कहानी हो
और मैं भी एक छोटी कहानी हूँ।

याद आया कि बच्चे सा हो जाना
की बच्चे सा हो जाना ही
खोलता है राज़ सारे।
याद आया बच्चे से हो जाना
याद आया बच्चे सा हो जाना।

तब याद आया कि बच्चा क्यों
होता है इतना निश्छल।
और याद आया बच्चे सा हो जाना
याद आया कि तुम भी एक छोटी कहानी हो
और मैं भी एक छोटी कहानी हूँ।

इसलिए छोटी छोटी कहानियों को
बड़े एहसासों में मत बदलो।
तुम भी एक छोटी कहानी हो
और मैं भी एक छोटी कहानी हूँ।

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