।। उम्र भर ।।

।। उम्र भर ।।


वो सब्र करते रहे उम्र भर
वो दर्द पीते रहे उम्र भर

सोचते थे कि कभी तो वक़्त बदलेगा
सोचते थे कभी तो आएगी उनको याद

कभी तो वो लिखेंगे उनको चिट्ठी
कभी भेजेंगे कोई संदेश

वो करते रहे इंतेज़ार उम्र भर
जागते रहे हर रात उम्र भर

वो सब्र करते रहे उम्र भर
वो दर्द पीते रहे उम्र भर

मिले थे उससे उसी के घर के सामने
नज़रें मिली थी उसी के घर के सामने

मिलना फिर बढ़ने लगा था
रातें अब दोनों के लिए ही तन्हा रहने लगी थीं

वादा होने लगा था साथ देने का उम्र भर
कहते थे वक़्त यूँ ही काटेंगे एक साथ उम्र भर

वो सब्र करते रहे उम्र भर
वो दर्द पीते रहे उम्र भर

फिर एक दिन अचानक सब कुछ बदल गया
वो हो गये किसी और के

सोचा मिल के पूछ ही ले कि क्या थी वो मज़बूरी
कि यूँ उन्हें होना पड़ा किसी और का

पर वो पूछ ही न पाए उम्र भर
और तड़पते रहे याद में यूँही उम्र भर 

वो सब्र करते रहे उम्र भर
वो दर्द पीते रहे उम्र भर

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