।। अधूरी कहानी ।।

।। अधूरी कहानी ।।


अभी ये कहानी 
कहाँ हुई पूरी
अभी तो है ये अधूरी।
क्या चाहिए किसी कहानी
को पूरा करने के लिए।
ज़रूरी तो नहीं
कि अंत में सब अच्छा हो
ज़रूरी तो नहीं
कि सब्ज़ बाग ही दिखाए जाएं।
क्या युद्ध में लड़ते हुए जो शहीद होता है
उसकी कहानी अधूरी रह जाती है
या हो जाती है पूर्ण?
क्या कोई भी कहानी
कभी हो पाती है पूर्ण?
सच तो ये है
कि कहानियाँ तो सिर्फ कहानियों में ही
होती हैं पूरी
हक़ीक़त में तो रह जाती है अपूर्ण।
रह जाती है
कोई न कोई कशमकश 
बाकी।
रह जाती है
कोई न कोई कहानी
बाक़ी 
हर कहानी में।
कहाँ हो पाती है
कोई कहानी पूर्ण।
रह जाती है
बाक़ी
कोई न कोई चाहत
हर कहानी में।
कहाँ हो पाती है
कोई कहानी पूर्ण।
रह जाता है
अधूरा
कोई न कोई मंज़र
हर कहानी में।
सच तो ये है
कि इसी अपूर्णता
मे ही छिपी है पूर्णता।
कहाँ मिल पाती 
किसी को भी पूर्णता
जब तक वो करता रहता है पूर्णता की तलाश।
पर अनायास वो हो जाता है पूर्ण
जो छोड़ देता है 
हर तलाश।
जो छोड़ देता है
चाहत पूर्ण हो जाने की।
जो छोड़ देता है
अहंकार
कि वो हो सकता है पूर्ण।

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