अपने शर्मा जी
भूमिका
आप सोच रहे होंगे कि ये अजीब सा नाम क्यों। अरे भाई ये कहानी है हमारे शर्मा जी की और बेचारे थोड़ा कम हँसते हैं। बेचारे सुबह-सुबह ही कोई न कोई दुखी रहने का कारण ढूंढ लेते हैं और फिर कोई हंसी की बात हो तो सिर्फ हा हा हा कह के निकल लेते हैं। दरअसल हमारे शर्मा जी के पिताजी काफी पारंपरिक विचारधारा वाले थे, संघ के सदस्य थे और बेचारे शर्मा जी को बचपन से ही आदर्शो की घुट्टी पिलाते रहते थे।
अरे मैंने आपको शर्मा जी का पूरा नाम तो बताया ही नही। शर्मा जी का पूरा नाम है आदर्श लाल शर्मा। जी हां पिताजी आदर्श कूट-कूट कर भर देना चाहते थे इसलिए नाम भी रख दिया आदर्श लाल। अब जब दुनिया में इतने गम हैं तो हमारे शर्मा जी को हंसने के मौके कम मिलते हैं। हालांकि की आपको बहुत मिलने वाले हैं, तो आप दिल खोल के हँसियेगा।
आईये आपको शर्मा जी के परिवार से भी मिला देते हैं। जी परिवार शुरू होता है पत्नी से तो शर्मा जी की भी एक पत्नी हैं। जी हाँ एक ही है, क्या करें एक ही रखनी पड़ती है। खैर, शर्मा जी की पत्नी, इनका नाम है पूनम शर्मा, उम्र पैंतालिस साल, हमारे शर्मा जी तीन साल छोटी। उम्र के कारण इनका शरीर थोड़ा मोटा हो गया है लेकिन आप मध्यम कद काठी का बोल सकते हैं। गोल चेहरा, सुंदर कि अभी भी मोहल्ले के कुछ लड़के शर्मा जी को टेंशन दे जाते है। आप समझ गए होंगे, अरे नही उतना नही, आप कुछ ज़्यादा आगे की सोच गए हमारी भाभीजी अरे शर्मा जी की पत्नी तो शुद्ध भारतीय नारी हैं एकदम पतिव्रता। लड़के ही उनकी सुंदरता को देख कर मचल जाते हैँ। बात शर्मा जी तक पहुंचती है तो आप जानते है शर्मा जी को, बेचारे को देश की चिंता हो जाती है। क्या होगा देश का भविष्य जब युवा पीढ़ी इस तरह आवारागर्दी करती फिरेगी, वगैरह-वगैरह और सो जाते थे यही बड़बड़ाते हुए। पूनम जी से शर्मा जी की शादी उन्नीस साल पहले हुई थी।
पिताजी ब्रम्हचर्य की बात करते थे और शर्मा जी एक आज्ञाकारी पुत्र होने के नाते पूरी तरह उनकी बात का मान रखते थे, मजाल है कि कभी किसी लड़की की तरफ नज़र उठा के देखी हो। लेकिन पिताजी ने ही शादी भी करा दी। जहाँ उन्होंने बोला शर्मा जी ने वहीं शादी कर ली वो भी बिना लड़की देखे। अब सुहागरात को शर्मा जी ने पूनम जी को देखा और ब्रम्हचर्य तोड़ने पर मजबूर हो गए और ब्रह्मचर्य ऐसा तोड़ा की ठीक नौ महीने बाद पहले बच्चे के बाप बन गए।
जी हाँ ठीक सुना आपने बाप। जी हां बेटे के बाप। आप भी सोचते होंगे शर्मा जी जैसे लोग भी बाप बन जाते हैं। लेकिन ये सच है। आज भी उन्हें वो दिन याद है जब पहली बार अपने बच्चे को देखा था आंखें छलक आयीं थी। खुशी इतनी थी कि घूम-घूम कर मिठाई बांटी थी। आज वो बेटा लगभग अट्ठारह साल का हो गया है। लंबी कद काठी, स्मार्ट और शर्मा जी से ठीक उलट, क्यूंकि आजकल के बच्चों को आप चाहे जितना भी अपनी तरह से ढालने की कोशिश करें वो समय के साथ ही चलना पसंद करते हैं। हाँ इसीलिए बाप बेटे में कम बनती है। हाँ नाम तो बताना भूल ही गया। तो अब आदर्श लाल के बेटे हैं तो नाम तलाशने में भी उतनी ही मशक्कत करनी पड़ी। डिक्शनरी में ढूंढा गया, कोई नाम पसंद ही नही आता था। आखिर में नाम रखा गया सत्य। तो सत्य साहब अभी बारहवीं की परीक्षा देने की तैयारी में हैं। पढ़ने में ठीक हैं लेकिन ड्रामा इनका मुख्य शौक है और मुंबई जा कर अपना कैरियर बनाना चाहते हैं।
जी हाँ इनकी एक छोटी बहन भी है, पूजा। अपनी माँ की तरह खूबसूरत और ज़हीन। अभी नौवीं कक्षा में हैं लेकिन आप किसी भी समस्या पर इनकी राय ले सकते हैं। सोलह साल की पूजा का शौक है संगीत।
तो ये तो था परिवार का परिचय लेकिन हमारे मुख्य किरदार शर्मा जी थोड़े अलग तरह के किरदार हैं और इनके लिए देश सबसे पहले है, बहुत सोचते हैं देश के लिए इसीलिए परेशान भी रहते हैं। अब कल की ही बात लीजिए गए थे बच्चों के साथ फ़िल्म देखने। फ़िल्म देखना पसंद नहीं है वो आज के दौर की तो बिल्कुल नहीं, कहते हैं आजकल की फिल्मों में अश्लीलता के अलावा कुछ नहीं होता। लेकिन बच्चों की ज़िद पर और इस शर्त पर कि फ़िल्म साफ-सुथरी होगी देखने को तैयार हुए। थियेटर पहुंचने पर एंट्री वाले दरवाज़े पर पहुचे। गॉर्ड ने सब की चेकिंग की सिवाए शर्मा जी के। अब आप क्या करते ऐसी परिस्थिति में? ज़ाहिर सी बात है कि कुछ भी नहीं और सीधे अपने परिवार के साथ हॉल में अपना स्थान ग्रहण करते। लेकिन शर्मा जी आप तो जानते हैं कि थोड़ा अलग हैं सो उन्होंने सत्य को रोका और बाकी लोगों से कहा कि जाओ हम अभी आते हैं। सत्य समझ गया कि कुछ गड़बड़ होने वाली है।
शर्मा जी गॉर्ड से बोले, ‘कौन है कौन तेरा मालिक? कौन है बता मुझको, किसने तेरे जैसे गद्दार को नौकरी पे रखा?’
अब गॉर्ड को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, इस तरह के आदमी से पहली बार उसका पाला पड़ा था। वी भौंचक्का उनको देख रहा था और साथ में बाकी खड़े लोग भी। किसी की समझ में कुछ नही आ रहा था और सब जल्दी से अंदर जा कर फ़िल्म देखना चाहते थे। भीड़ भी बढ़ गई थी।
सिर्फ सत्य कुछ-कुछ समझ पा रहा था। इसलिए बोला, ‘अरे पापा अंदर चलो, फ़िल्म शुरू हो जाएगी।’
मगर शर्मा जी का ध्यान सिर्फ गार्ड की तरफ था और उसको घूरते हुए बोले, ‘बेशर्म बताएगा कि नही की किसने तुझे रखा नौकरी पे?’
तभी दूसरे गार्ड ने माजरे को समझने की कोशिश की और बोला, ‘आखिर क्या बात है, आप आगे क्यों नहीं बढ़ रहे?’
‘ऐसे ही बढ़ जाऊँ, इसने मेरा सेक्युरिटी चेक क्यों नही किया? मेरे पास कोई अवैध सामान भी हो सकता था। अगर कोई अनहोनी हो जाती तो कौन ज़िम्मेदारी लेता? क्यों अपना काम ढंग से नहीं करते तुम लोग? मैं इस बात की शिकायत करूँगा।’ शर्मा जी एकदम गुस्से से बोले।
कुछ लोग उनकी बात सुन कर उनपे हंसने लगे, और कुछ लोग उन्हें पागल कहने लगे और कहने लगे कि अपना और हमारा दोनो का टाइम खराब कर रहे हैं।
खैर तमाशा बढ़ रहा था कि किसी तरह सत्य ने अपने पापा को समझाया और अंदर जाने के लिए मना लिया। हॉल के अंदर बैठने के बाद सत्य को थोड़ा सुकून महसूस हुआ। तभी राष्ट्रगान की बारी आई, सभी लोग खड़े हुए। राष्ट्रगान के बाद शर्मा जी ने दो तीन बार भारत माता की जय के नारे लगाए। सभी शर्मा जी की तरफ देखने लगे।
तो ये था हमारे शर्मा जी का परिचय। ऐसे ही हैं हमारे शर्मा जी।
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